Wednesday, September 16, 2009

हयात्त जब तुम दुबारा मिलोगी

जब भी मई किसी आदमी से दुबारा मिलता हूँ तो कुछ ना कुछ बदलाव होता है। या तो वो वैसा नही होता जैसा था या मै वैसा नही होता जैसा हूँ। आज तो मै आपसे दूर पैसा कमाने के लिए आया हूँ। क्या आप भी बदल जाओगे? आप भी औरो की तरह नकली मुस्कानसे मिलोगी। अब मै तो कमसे कम आपसे ऐसा उम्मीद तो नही कर रहा हूँ। आप हमेशा पूछती हो की मै क्या कर रहा हूँ? कैसा हूँ? तो आप का जब भी दिल करें आप इस जगह आ कर सारी बातें पढ़ लेना। अभी एक एल्बम बिहार के सहरसा से कर के आया हूँ। यह काम भी उतना मजेदार नही रहा। पर पैसा भी बहुत विलंब से मिला। बिहारी होकर भी बिहारियों के साथ काम कराने में मुझे डर लगता है। कारण काम करवाने के बाद ये पैसा देने में बहुत खीच खीच करते है। मजदूर से भी ज्यादा काम करवाते है पर पैसा देते समय ......बाप रे बाप .....या यूँ कहें की दिल्ली में पैसा कोई भी देना ही नही चाहता है। इस बार कोई नई विडियो कंपनी थी, प्लानिंग के बिना ही मुझे भेज दिया था। अब कर के आया हूँ तो जैसा भी है काम ठीक है।
उन काम के दिनों में आपकी याद मुझे बहुत ही खामोशी से तड़पा जाती थी। बस आज नही तो कल मै आपसे मिलूंगा ही। इसी उम्मीद पर अपने आप को काम में इतना झोंक देता हूँ की पता ही नही चलता काम कब निपटा गया। फ़िर काम खत्म होते ही आप की याद आने लगती है। बस आपकी याद आपकी याद...

No comments:

Post a Comment